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सोमवार, 29 जून 2009

दारू पीते मर्द

दारू पीते मर्द


तन धन इज्‍जत बबार्द करे, जो दारू पीते मर्द ।
बच्‍चों की चिन्‍ता न हो , ना समझे घरवालों का दर्द ।।
घरवालों का दर्द , उसकी रोज पिटाई करता ।
घर में देवे न एक पैसा, पति होने का दम भरता ।।
बाल मेवाती कहे , वह दिल ही दिल में रोती।
दिन भर खटती घर के काम , रात को भूखी सोती।।

देख पिता को दारू पीते, बच्‍चे जाते डर।
अनाप-श्‍नाप बकता फिरे, जो करना है सो कर।।
करना है सो कर, उल्‍टे - सीधे कर्म है करता ।
सुबह होश आने पर, अपनी करनी से मुकरता।।
बाल मेवाती कहे, नित मधुशाला में जाए।
बच्‍चे घर में भूखे सोते,यह दारू में रकम उड़ाए।।

लाखों के घर दोस्‍तों , दारू किए बर्बाद।
इसको गले लगाकर, कौन हुआ आबाद ।।
कौन हुआ आबाद, जब बाप ही गलत कर्म करता ।
बड़ा होकर बेटा भी, उसी राह पर चलता।।
बाल मेवाती कहे, इनको आकर कौन समझाए।
अपनी बर्बादी के खुद मालिक, किसको दोष लगाए।।

बुधवार, 20 मई 2009

लोकसभा चुनाव 2009

लोकसभा चुनाव 2009


समय कभी ना चुकता। , समय न करता माफ।
लोकसभा चुनाव में, कितनों-को कर दिया साफ।।
कितनों को कर दिया साफ, अब करते रहो समीक्षा।
विधानसभा चुनाव में, समय से ले लो दीक्षा।।
"बाल मेवाती" कहे , जनता ने फैसला सुनाया।
कितने ही शहनशाहों को, कद से नीचे गिराया।।

सोनिया और राहुल ने , दौरों की चलाई ऑंधी।
भारत देश के बन गए , हीरो राहुल गॉंधी।।
हीरो राहुँल गॉंधी , युवाओं का मनोबल बढ़ाया।
अपने प्रतिद्वन्दियों को, मीठे में सबक सिखाया।।
"बाल मेवाती" कहे , कॉंग्रेस का अब कोई नहीं सानी।
लार टपकाते रह गए, लाल कृष्‍ण आडवाणी।।

जैसा उनका नाम है। , वैसे ही उनके बैन।
मुश्किल से पहचानते, लोग मनमोहन की सैन।।
मनमोहन की सैन, सदा बोले मृद भाषा ।
जन-जन का मन मोहते, पुरण करते आशा।।
"बाल मेवाती" कहे, लोगों ने इन्‍हें कमजोर बताया।
"पी.एम." की कुर्सी पर, दोबारा अधिकार जताया।।

भारत की जनता ने काँग्रेस पर किया विश्‍वास।
खुले दिल से अब आप भी, देश का करो विकास।।
देश का करो विकास, गरीबों का ध्‍यान रखना ।
सभी समुदाय को साथ ले , फिर आगे तुम बढ़ना।।
"बाल मेवाती" कहे, जो काम रह गए थे अधूरे ।
बागढोर आपके हाथ में है, सपने कर लो पूरे।।

नोट :- कवि ने यह रचना मात्र समसामयिक विषय को ध्‍यान में रखकर यह रचना की है । इसके माध्‍यम से वह किसी व्‍यक्ति, संस्‍था अथवा पार्टि का मान नहीं हनन करता है।

बुधवार, 29 अप्रैल 2009

चुनाव का करिश्‍मा

चुनाव का करिश्‍मा


लोकसभा का देश में , चल रहा आज चुनाव ।
चुनाव के माहौल में, नेतन के बदल गए स्‍वभाव।।
बदल गए स्‍वभाव , नेता गली-गली में घुमे।
वोट के खातिर , नेता मतदाता के पद चूमें।।
बाल मेवाती कहे, करूणा के बन गए मूरत ।
जीत के आने पर , इनकी नहीं दिखेगी सूरत।।


पी.एम. महोदय की सीट पर, सबकी टिकी नजर ।
देश, गरीबी, जनता की , इनको नहीं फिकर ।।
इनको नहीं फिकर, कोई मंदिर की बात उठावे।
अन्‍न, जल , कपड़ा मिलें न सबको, विकास की ताल बजावे।।
बाल मेवाती कहे , शहर-शहर में करते रैली ।
सभी पार्टी आज देश की , अस्मिता से खेली ।।


लोकतंत्र का देश में , हो रहा बुरा हाल।
जीतने के बाद नेता, चले बेढंगी चाल ।।
चले बेढंगी चाल, संसद की गरीमा खोते ।
इनका नाटक देख,भगवान सुबक-सुबक के रोते।।
बाल मेवाती कहे, अब जनता समझ गई है।
हमाम में सब नंगे हैं, सबको परख गई है।।


चुनाव के दौरान , नेता बोले मिठे बोल ।
एक-दूजे की खोलते, खड़े मंच पर पोल।।
खड़े मंच पर पोल,शब्‍दों के तीर छोड़ें।
अपने पापों की मटकी, दूजे के सिर फोड़ें।।
बाल मेवाती कहें,जीत के बाद करते हैं चिन्‍तन।
सरकार बनाने के खातीर, करते हैं गठबंधन।।

मंगलवार, 28 अप्रैल 2009

नेता की आत्मा

नेता की आत्मा

यमदूत और यमराज का वार्तालाप

यमलोक में यमदूत से , बोल रहे यमराज।
एक दलबदलू नेता , जग से विदा हो रहा आज।।
विदा हो रहा आज, तुम फौरन भारत में जाओं।
दिल्ली जा के, संसद भवन के चक्कर आप लगाओ।।
बाल मेवाती कहे, आत्मां संसद में घुस न पाए।
सांसदों से मिल, कहीं रिश्व त खाए और खिलाए।।

यमराज की बाते सून बोला यम का दूत।
दलबदलू नेता की हम, खूब सूनी करतूत।।
खूब सूनी करतूत , उनकी तो मर चुकी है आत्मा।
क्यों मजाक करते हो हमसे, आप मेरे परमात्मा ।।
बाल मेवाती कहे, नेताओं में आत्माआ कहाँ से आई ।
ऊपर से सफेदपोश, भीतर से बढ़ रही खाई।।

मंगलवार, 21 अप्रैल 2009

11 जुलाई, 2006

11 जुलाई, 2006

11 जुलाई मंगल के दिन, ऐसा बरपा कहर।
आर्थिक नगर मुम्बई शहर, अचानक गया ठहर॥

अचानक गया ठहर, निशाचरों ने खूनी खेल रचाया।
दिल की धड़कन लोकल ट्रेनों में, बम विस्फोट कराया॥

रोजी-रोटी कमावन खातिर, घर से निकले लोग।
किसी को क्या खबर, काल का बनना पड़ेगा भोग॥

बनना पड़ेगा भोग, आतंक ने अपना रंग दिखाया।
किसी का बाप किसी का बेटा, काल गाल समाया॥

न जाने कितने अपाहिज हुए, कितने जन परिवार से बिछड़े।
शासन प्रणाली मूक बनी, जुलमी कब तक जायेंगे पकड़े॥

कहे 'मेवाती सारंग', भारत माता कब तक घायल होगी।
सब मिलकर करो मुकाबला, वरना गले पर धार चलेगी॥